Sunday, November 23, 2025

चमत्कार

                                                      चौंतीस साल बाद...

बहुत सालों से एक इच्छा मन में दबी हुई थी कि मां-पापाजी के साथ सब भाई-बहन एक फोटो खिंचवाएंगे अरथिंग के पास। मेरी सबसे पुरानी फोटो वही है जिसमें मैं नीचे बैठा हूं। बाद में पता चला था कि वह फोटो मां-पापाजी की शादी की पच्चीसवीं सालगिरह पर ली गई थी। 30 जून, 1991 के बाद मैं वैसी ही एक और फोटो खिंचवाना चाहता था जिससे तुलनात्मक रूप से साफ पता चल सके कि कौन कितना बदला है। ऐसी कुछ तस्वीरें मैंने लोगों को सोशल मीडिया पर शेयर करते देखा था।

एक बार कुछ सालों पहले मैंने ऐसा प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाया था। जब पापाजी ने ये कहा था कि वह अस्सीवें सालगिरह पर एक पूजा देना चाहते हैं तो मुझे यहां संभावना इस बात की दिखी। बड़ी दीदी से बात करके सारे भाई-बहन को जुटाने की योजना पर काम करने के बाद भी जैसा मैं चाह रहा था वह असंभव-सा दिख रहा था क्योंकि छोटकी दीदी बेगूसराय आने की स्थिति में नहीं थी और मुन्नू जी से उसके अलावा कोई सीधे मुंह बात नहीं करना चाहता था। ऐसे में इस आयोजन का पूरा दबाव पापाजी पर आ जाता जोकि मैं नहीं चाहता था। एक और विकल्प कुश के इंगेजमेंट के मौके पर भी मुझे सूझा था लेकिन वहां मुन्नू जी को आमंत्रित नहीं किया जाना था और अगर दीदी को छोटकी दीदी के यहां बुलाकर वहां फोटो का कार्यक्रम रखता तो वहां कई तरह की तकनीकी बाधा थी। मुझे अच्छी तरह याद है कि कुछ समय पहले मैंने भारी मन से यह विचार त्याग दिया था और मन को समझा दिया था कि अब ऐसा संभव नहीं है।

मेरी इस इच्छा की भनक शायद उस शक्ति को मिल गई जो मेरे साथ कई बार चमत्कार करता आया है। पापाजी के जन्मदिन पर मां के साथ हम सभी भाई-बहन ने फोटो खिंचवाई और यह संभव हो गया। हो सकता है कि यह ऐसे ही संभव होना लिखा हो। लेकिन हो तो गया। जो नहीं होना लग रहा था वह हो गया।









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