Sunday, April 19, 2026

ग्रह-नक्षत्र का किया

                                     

                                                    दाने-दाने को मोहताज..

पिछले कुछ दिनों से खानपान ठहरा हुआ जैसा है। 2 अप्रैल को मुंबई आने के बाद से घर में सही से चुल्हा नहीं जला है। अपने नाम पर जो सिलेंडर था उसे ट्रांसफर करके पूर्णिया ले जाने के बाद अब यहां एक आधे भरे सिलेंडर के सहारे दिन चलाना है। जो सिलेंडर है वह मकानमालिक का है और केवाईसी के चक्कर में रिफिल ऑर्डर नहीं हो पा रहा। उनका कार्ड कब से ऐसे ही पड़ा था और जब जरूरत पड़ी तो अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से सिलेंडर लेना पहले जैसा सामान्य रहा नहीं!

15 फरवरी को जब मैं निकला था मुंबई से तो तय यही था कि अब वापस कभी इस शहर नहीं आएंगे। अररिया में काम और फिर पूर्णिया में अपना ऑफिस शुरू करने को लेकर तैयारियां मन में चल रही थी। कामोठे से फ्रीज, वाशिंग मशीन, सोफा कम बेड, फर्नीचर, ड्रेसिंग टेबल, आलमीरा वगैरह आधे दामों पर बेचा जा चुका था। कुछ किताबों और कपड़ों को छोड़कर घर में कुछ नहीं बचा था। 

अररिया के अरूण होंडा में रविवार को छुट्टी नहीं थी। घर से जाना-आना मुश्किल होता गया और 25000 की नकदी सैलरी में बजट बिगड़ते-बिगड़ते इतना बिगड़ा कि उल्टे पैर वापस मुंबई आना पड़ा। दूसरी तरफ घर-सामाज को लेकर जो दिक्कतें पैदा हुईं वह बेहद दर्दनाक और अपमानजनक सी लगने लगी। ऐसा लगा कि अपना वजूद ही खत्म हो गया। लाडली ने हर तरह मदद करने की कोशिश की। भाग्य के व्यवहार से मन रह-रहकर टूटता गया। आखिरकार 1 तारीख को पटना- सीएसटी सुविधा ट्रेन लेकर मुंबई लौट आया। आने से एक- दो दिनों पहले बड़ी दीदी से भी रिश्ते खराब हो गये। मेरी एक गलती की सजा उसने पापाजी को देकर मुझसे स्थाई दुश्मनी मोल ले ली।

खैर, मुंबई आने के बाद ऐसा लगा जैसे किसी खंडहर में घुसा हूं। सबसे पहले इतने दिनों से पड़े चादर को बदलने चला तो ध्यान आया कि दूसरा चादर तो है ही नहीं। यहां से जो अहसास शुरू हुआ वह होते ही चला गया। न फ्रीज, न कपड़े साफ करने के लिए वाशिंग मशीन, न कपड़े रखने के लिए आलमीरा और न ही तेल-कंघी वगैरह के लिए ड्रेसिंग टेबल। खैर, चीजें चलती रही। सबकुछ होता रहा।

आते के साथ नागपुर और वर्धा जाना हुआ। अब दिन-ब-दिन ऐसा लगने लगा है कि बिना खाना बनाए ही रहना पड़ेगा। कुल मिलाकर ग्रह-नक्षत्र का ऐसा योग बना कि अपने हाथों से मैंने अपनी ही गृहस्थी लुटा दी और फिर उसी गृहस्थी में आकर दाने-दाने को मोहताज हो गया। यही है करम का लेखा जो कोई काट नहीं पाता।

Sunday, April 12, 2026

Good bye Asha Bhosale

 A day with hustle bustle, couldn't reach Breach Candy Hospital on time and missed all calls.

Saturday, March 28, 2026

Saturday, March 21, 2026

क्रूरता का दौर

 जो बीत रहा है वहां क्रूरता भरी है।