Saturday, October 24, 2026

मन की बात

 दादरा और नगर हवेली का अंधेरा

बिल को‌ लेकर सवाल, महेश का बीच में बोलना, ट्रिगर होना, सुधाकर का आमंत्रण, बेटे से लेन-देन के समय पैर जुलाना, प्रदीप जी का चावल बाद में लेने की सीख और अंदर की तमाम कुंठाओं से लड़ना।

Sunday, October 18, 2026

 Antop hill toilet gate locked from inside stuck worked 

Sunday, October 11, 2026

प्रोफ़ेसर कॉलोनी

 है धुआँ है धुआँ हर तरफ़ है धुआँ...

मामाजी के यहाँ बिताये हुए उन महीनों को याद करते हुए कुछ ख़ास चीजें याद आती हैं। सबसे ख़तरनाक वह शाम थी जब दिनेश मेरा पीछा करते हुए मामाजी के घर तक आ गया था। एक वह भी जब पापाजी ग़ुस्से में घर से निकल गये थे, उन्हें देर हो रही थी और खाना शायद तबतक नहीं बना था। बाद में मामाजी ने माँ से नाराज़गी जताई थी। मुन्ना भैया की मजबूरी में वहाँ रहने वाली बात, जो मुझे कटाक्ष सी लगी और फिर बिक्कू भैया की बातें। अंत में जब हमलोग वहाँ से निकलने लगे थे और कुछ वापस छूटने पर वापस आने को थे तो मामी का क़रीब-करीब यह कहना कि वापस मत आइए।

धन्यवाद कभी-कभी ही पूरे मन से संपूर्ण होता है। मुन्नू जी प्रकरण के बाद जो समय प्रोफ़ेसर कॉलोनी में बीता वह बेहद ख़ास रहा। मैट्रिक का रिज़ल्ट, जो कि बहुत घटिया रहा और साथ में कई और चीजें।

ये अंधेरा कब छँटेगा...

Saturday, October 3, 2026

साइकिल के पहिए वाली वह वीडियो जितनी बार देखता हूँ, रूक-रूक कर देखने लगता हूँ। ऐसा सभी वीडियो के साथ नहीं है लेकिन इस तरह के इंस्टग्राम वीडियो में कुछ तो ऐसा देखता हूँ जो बहुत ज़्यादा ही ख़ुद से जुड़ा हुआ सा लगता है।

साइकिल के उस टायर से कितना गहरा जुड़ाव है मेरा। कुछ-कुछ यादें ऐसी होती हैं कि कलेजा मुँह को आने लगता है जब उसके बारे में मन सोच रहा हो तो। बाड़ी से लेकर गली के पोलतक और फिर कहां-कहां तक मैं उस टायर को चलाता रहता था। बाद में फिर मैंने साइकिल सीखा, फिर मोटरसाइकिल और फिर कार। 

एक बार उस टायर को चोरी कर लिया गया था। संयोग से मैं तक सहनी की तरफ़ गया था और देखा कि मेरा टायर वहाँ रखा था। वे लोग चोर थे यह तो मालूम था लेकिन अपना चोरी किया हुआ सामान चोर के घर देखने का मेरा वह पहला अनुभव था, और शायद अंतिम भी। मैं वहाँ से उसे ले आया और डर से पलट-पलट कर देख भी रहा था कि कोई मुझे ऐसा करते हुए देखे नहीं। मैं बचपन से डरपोक था। कभी-कभी लगता है कि एक दौर इस बीच में मैंने ऐसा भी जिया जिसने डर को ख़त्म कर दिया था। सिटी न्यूज़ में आने के बाद का दौर। एक बार नगरपालिका चौक के पास अंडा दुकान के सामने एक के साथ झगड़ा किया और उसे कहा कि जिसको बुलाना है बुला ले। ऐसा दो-तीन और बार हुआ। एक-दो बार मैंने मार भी खाया और बेइज़्ज़ती भी हुई लेकिन मीडिया में आने के बाद जो थोड़ी-बहुत पहचान बनी थी उसके बदौलत हिम्मत तो आया था। खैर...

Saturday, September 26, 2026