Ekadashi, Machhli aur Dukh hi Dukh
Y K SHEETAL
JOURNALIST
Saturday, March 28, 2026
Saturday, March 21, 2026
Saturday, March 14, 2026
ये लोग
जवाबदेहियो से घिरा आदमी हाथ खाली रहने पर काल कोठरी में अकेला पड़े किसी निरीह सा महसूस करता है। विकास सारथी के तकादे और भैया से आपात स्थिति में दस-दस हजार के कर्जे, लाडली से बारह सौ पचपन के कर्ज और क्रेडिट कार्ड के पैंसठ हजार के बिल के अलावा अररिया, पूर्णिया, शिव कुमार दास, अरूण भैया का भरोसा, मुंबई का किराया, जीजाजी की धूर्तता, पारिवारिक जीवन में मचा तूफान सहित कितनी ही छोटी-बड़ी बातों को मन में दबाए 1207 एटियाना की सीट पर बैठा था। फोन आफ था क्योंकि जितनी चीजें दिमाग में भरी थी उसके बाद एक मैसेज के लिए भी जगह नहीं था।
काफी देर के बाद जब घुटन बढ़ गई तो फोन आन कर दिया कि मैसेज पढ़कर कुछ मन बहल जाए। वाट्सएप पर सा
Tuesday, March 10, 2026
Arun Honda
डीएलए और दूरदर्शन कैजुअल का वह दौर करीब-करीब एक साल तक चला था। डीएलए में मालिक से पहचान की वजह से मिलने वाली छूट ने दूरदर्शन के सफर को थोड़ा सा आसान कर दिया था और दूरदर्शन में आईआईएमसी की वजह से बने अच्छे रिश्ते ने डीएलए को आसान कर दिया था।
ग्रह-नक्षत्र बड़ी चीज होती है। मसलन कोई कुछ कहे यह तो सच है कि जीवन में यात्राएं लिखी है कर्मक्षेत्र पर। दिल्ली से नोएडा और नोएडा से मुंबई होते हुए अररिया तक में कभी ऐसा नहीं हुआ कि दफ्तर के लिए सोचना न पड़े। न्यू अशोक नगर में ऑटो के लिए कैसे भागमभाग होती थी सुबह में और फिर कई-बार ऐसा होता था कि ऑटो दूसरे रुट वाली मिल जाए तो वहां से पैदल चलना पड़ता था। पूर्णिया से अररिया में हू-ब-हू वैसे ही हो रहा है। बस अररिया वाली मिले तो जीरो माईल तक और आगे वाली मिले तो फिर ठीक। मुंबई का तो कहना की क्या। एंटोप हिल में 171,172 और 88 बस के लिए कितनी बार कितने ही मिनट बर्बाद हुए। फिर घाटकोपर भी ऐसा ही था, घर से चलते-चलते स्टेशन तक और फिर वहां से लोकल, लोकल से उतर कर फिर टैक्सी या बस। नवी मुंबई यानि कि कामोठे का तो फिर कहना ही क्या। भागमभाग ऐसी बनी रहती थी कि क्या कहा जाए। कभी-कभी सोचता हूं कि क्या कभी वह दौर आएगा कि घर में ही ऑफिस और बैठे-बैठे ही रुपये!
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इस बीच
कल आखिरकार वही हुआ जिसका डर था। एक यूनिफॉर्म पहनना था। यह इस दौर का सबसे विचलित करने वाले दिनों में से एक था।


