Saturday, November 15, 2025

आपदा

 

शुक्रवार की शाम आया वह फोन सदमे की तरह कई सालों तक याद रहेगा। 

"बेगूसराय से फोन‌ आया था कि पापाजी का एक्सीडेंट हो गया है..."। सूख चुके आंखों में आंसू नहीं आए लेकिन चिंगारी आ गई। लगा कितने सपने तवाह हो गये‌ और कितना बना बिगड़ गया!

पूंजीवादी व्यवस्था की क्रूरता का एहसास ऐसे ही समय में होता है।

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