Sunday, October 11, 2026

प्रोफ़ेसर कॉलोनी

 है धुआँ है धुआँ हर तरफ़ है धुआँ...

मामाजी के यहाँ बिताये हुए उन महीनों को याद करते हुए कुछ ख़ास चीजें याद आती हैं। सबसे ख़तरनाक वह शाम थी जब दिनेश मेरा पीछा करते हुए मामाजी के घर तक आ गया था। एक वह भी जब पापाजी ग़ुस्से में घर से निकल गये थे, उन्हें देर हो रही थी और खाना शायद तबतक नहीं बना था। बाद में मामाजी ने माँ से नाराज़गी जताई थी। मुन्ना भैया की मजबूरी में वहाँ रहने वाली बात, जो मुझे कटाक्ष सी लगी और फिर बिक्कू भैया की बातें। अंत में जब हमलोग वहाँ से निकलने लगे थे और कुछ वापस छूटने पर वापस आने को थे तो मामी का क़रीब-करीब यह कहना कि वापस मत आइए।

धन्यवाद कभी-कभी ही पूरे मन से संपूर्ण होता है। मुन्नू जी प्रकरण के बाद जो समय प्रोफ़ेसर कॉलोनी में बीता वह बेहद ख़ास रहा। मैट्रिक का रिज़ल्ट, जो कि बहुत घटिया रहा और साथ में कई और चीजें।

ये अंधेरा कब छँटेगा...

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