Saturday, October 3, 2026

साइकिल के पहिए वाली वह वीडियो जितनी बार देखता हूँ, रूक-रूक कर देखने लगता हूँ। ऐसा सभी वीडियो के साथ नहीं है लेकिन इस तरह के इंस्टग्राम वीडियो में कुछ तो ऐसा देखता हूँ जो बहुत ज़्यादा ही ख़ुद से जुड़ा हुआ सा लगता है।

साइकिल के उस टायर से कितना गहरा जुड़ाव है मेरा। कुछ-कुछ यादें ऐसी होती हैं कि कलेजा मुँह को आने लगता है जब उसके बारे में मन सोच रहा हो तो। बाड़ी से लेकर गली के पोलतक और फिर कहां-कहां तक मैं उस टायर को चलाता रहता था। बाद में फिर मैंने साइकिल सीखा, फिर मोटरसाइकिल और फिर कार। 

एक बार उस टायर को चोरी कर लिया गया था। संयोग से मैं तक सहनी की तरफ़ गया था और देखा कि मेरा टायर वहाँ रखा था। वे लोग चोर थे यह तो मालूम था लेकिन अपना चोरी किया हुआ सामान चोर के घर देखने का मेरा वह पहला अनुभव था, और शायद अंतिम भी। मैं वहाँ से उसे ले आया और डर से पलट-पलट कर देख भी रहा था कि कोई मुझे ऐसा करते हुए देखे नहीं। मैं बचपन से डरपोक था। कभी-कभी लगता है कि एक दौर इस बीच में मैंने ऐसा भी जिया जिसने डर को ख़त्म कर दिया था। सिटी न्यूज़ में आने के बाद का दौर। एक बार नगरपालिका चौक के पास अंडा दुकान के सामने एक के साथ झगड़ा किया और उसे कहा कि जिसको बुलाना है बुला ले। ऐसा दो-तीन और बार हुआ। एक-दो बार मैंने मार भी खाया और बेइज़्ज़ती भी हुई लेकिन मीडिया में आने के बाद जो थोड़ी-बहुत पहचान बनी थी उसके बदौलत हिम्मत तो आया था। खैर...

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