Thursday, February 26, 2026

अंधकार ही अंधकार

                                                     ऐसा दौर...

पुणे में एक निचली अदालत के बाहर एक आदमी से आत्महत्या कर ली। बिना गूगल देखे जो याद है वह यह कि उसका कोई सिविल मैटर कोर्ट में चल रहा था जो हर तारीख को अगली तारीख में बदलता जा रहा था। जो खबरें छपी उसके मुताबिक मामला उसके जमीन से संबंधित था और बार-बार तारीख मिलने के बाद एक दिन उसने आत्महत्या कर लिया।

पिछले साल 16 अक्टूबर को हिंदुस्तान टाइम्स की वेबसाईट पर छपी इस खबर के मुताबिक उसकी उम्र इकसठ साल थी और वह उसके मामले की सुनवाई पिछले इक्कीस साल से हो रही थी। आखिरकार उसने कोर्ट के तीसरे फ्लोर से सवेरे करीब पौने बारह बजे छलांग लगाई और अपना वजूद समाप्त कर लिया। बाद में पुलिस को उसके पास से एक सुसाइड नोट मिला जिससे पता चला कि नब्बे के दशक में उसके पिता ने जिस पुश्तैनी जमीन को बेचा उस बिक्री को उसने कोर्ट में चुनौती दी थी और वह इस सुनवाई के दौरान घोर मानसिक प्रताड़ना से जूझ रहा था। उसे एक टुकड़ा दिया गया था लेकिन उसपर उसके भाई ने कंस्ट्रक्शन किया जिसे बात में कोर्ट ने स्टे लगाया लेकिन फिर स्टे हटा लिया गया। कुल मिलाकर चीजें हर स्तर पर उलझी हुई थी। उसकी बेटी को बयान दर्ज के लिए पुलिस ने बुलाया और पूरे मामले को कानूनी दृष्टिकोण से देखते हुए मामले को रफा-दफा कर दिया गया। कौन पड़े इस झमेले में कि वह मरने से पहले कितनी बार मरा था और कितनी बार मर रहा था...

ऐसी ही एक खबर थी पुणे की जहां पोर्श कार मामला। एक लड़के ने नशे में एक बेशकीमती कार से कुछ लड़कों को कुचल दिया। मौते हुई। पुलिस ने जांच की और मामला दबता गया। मामला एक बार फिर उफान मारा जब पता चला कि मेडिकल रिपोर्ट में तो ड्राइवर के खून में नशा नहीं मिला लेकिन सीसीटीवी से पता चला कि उसने थोड़ी देर पहले ही जमकर दारू पी थी। जांच फिर बढ़ी तो पता चला कि वहां के एक बड़े अस्पताल के कुछ बड़े अधिकारियों ने रुपये लेकर खून बदल दिये थे। यही कोई दो-चार लाख। कहीं चिता जली लेकिन कही पैसों की भूख भरी नहीं! ससून अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी जिसने रक्त में नमूनो में बदलाव किया से लेकर उस लड़के के परिवार वालों को पहले बॉम्बे उच्च न्यायालय और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत दे दी। ट्विटर पर बहुत लोगों ने बहुत कुछ लिखा लेकिन कुछ नहीं हुआ। अनिश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की चिता जल गई और उन दोनों के जाने की टीस उनके परिवारों को ताउम्र रहेगी लेकिन किसे पड़ी है...


भागलपुर में विक्रमशिला ब्रीज पर एक महिला का अपने छोटे से बेटे के साथ पुल से कूदने के प्रयास करने के दौरान एक पुलिसवाला द्वारा बचाने का वीडियो वायरल हुआ था। हिम्मत जुटाकर देखा तो औरत भी गरीब थी और बच्चा एकदम ही अबोध था। ऐसी कुछ तो नाउम्मीदी होगी जो उस औरत को लगा होगा कि मर जाना ही अब एकमात्र उपाय है। यह वीडियो एकदम थर्रा देने वाला था।


No comments:

Post a Comment