विक्रांत और लेन-देन
यह एक संयोग जैसा था लेकिन लगा जैसे कोई परीक्षा ली जा रही हो। मई में जब विक्रांत के यहाँ दांत दर्द से कराहते हुए गया था तो ईलाज उस दिन लंबा चल गया। जो मुझे लगा था कि एक-दो घंटे में वहाँ से फ़्री हो जाऊँगा वह वहाँ पाँच-छह घंटे लगे क्योंकि विस्डम टूथ को निकालना पड़ा और उसकी प्रक्रिया एक्स-रे और बाक़ी चीजों से होकर गुजरी। अंत में उसने बाईस हज़ार का बिल बनाया था जो मैंने तब क्रेडिट कार्ड से चुका दिया। हालाँकि उस पूरी रात और अगले कुछ दिनों तक मैं बहुत परेशान रहा कि इतने पैसे फ़ालतू में लग गये लेकिन राहूकाल में ऐसे कई अनुभव पहले भी मिले थे जब अकस्मात् कोई खर्च आ जाता या फिर हाथ में रखे पैसे यूँ ही कहीं खर्च हो जाते। क़र्ज़ चुकाने के प्रयास असफल होते जाते और क़र्ज़ नहीं लेने की प्रतिबद्धता भी मज़बूत नहीं हो पाती।
इस घटना के कुछ दिनों बाद जब विक्रांत घबराये हुए मेरे पास आकर उसे मिलने वाली धमकियों के बारे में मुझे बताया था जो कि उसकी गर्लफ्रैंड के किसी दूसरे ब्वायफ्रैंड से उसे मिल रही थी तो उस रोज़ मैं उसे पुलिस थाने ले गया था और वहाँ जाकर पूरा मामला सेटल करवाया। उसी दिन थाने से निकलते हुए विक्रांत से उस बाईस हज़ार के एक बड़ा हिस्सा मुझे वापस कर दिया था ऑनलाइन। मुझे लगा कि मेरी फ़ी मिल गई और रिग्रेट भी कम हो गया। मैं यह भी सोच रहा था कि क्या होता अगर मैं उस वक्त बारगेनिंग करता जब मैं उसे बाईस हज़ार रुपये दे रहा था। मैंने नहीं किया और कलेजे पर पत्थर धरे रहा। बाद में मुझे मेरे चुकाए रुपयों पर छूट भी मिली और मेरी छवि भी उसके सामने अच्छी बनी उस दिन कि मैंने कोई बारगेनिंग नहीं की।
इस बीच मुझे भाग्ये के लिए कुछ रुपयों की ज़रूरत थी। मैंने उसे कहा और उसने पच्चीस हज़ार रुपये भेज दिये। यह रुपये अभी भी मुझपे उसका क़र्ज़ है।
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