पापाजी का गणित
पिताजी की पुरानी लेखनी और उनके कागजात देखकर यही लगता है कि पापाजी एक ऐसे योद्धा थे जैसा कोई दूसरा मैंने अपने जीवन में नहीं देखा।
उनका डिक्टेशन, गणित की पढ़ाई, हिंदी-अंग्रेजी का ज्ञान और कितना कुछ था जो मौका-बेमौका वह देते थे। सरस्वती से हमेशा वह संबद्ध रहे। आज किसी जमाने का उनका ये कागज देखा तो फिर से गर्व हुआ कि मैं उनका बेटा हूं। जानकारी के अभाव में मन में उनको लेकर अलग-अलग भावना आती रही लेकिन कभी-कभी सुकून भी मिलता रहा कि जो हो पाया मैंने किया।

No comments:
Post a Comment