कुछ समय पहले की बात है, कुछ साल शायद! डीएसएनजी में बैठकर मैं कहीं जा रहा है। स्वप्निल और दर्शन के साथ मैं बैठा था। स्वप्निल गाड़ी चलाते-चलाते हंसा साईड मिरर में देखकर। फिर बोला सर देखा आपने पीछे। मैंने कुछ नहीं देखा था। फिर उसने कहा कि पीछे आ रही गाड़ी दो पलटी मारकर वापस चलने लगी।
भैया के साथ जो परसों हुआ वह वैसा ही था। जो हुआ वह चमत्कार ही था।
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