इनय्या के इक्कीस साल
ऐसा इतनी बार हो चुका था कि उनका एक्च्वल बर्थ-डे मुझे याद रहे न रहे यह जरूर याद रहता था कि जून महीने के किसी दिन ऐसा हुआ था। इनय्या वाली घटना हमसब के मस्तिष्क पर एक अटल छाप छोड़ा हुआ था। पापा जी ने इसे रि-बर्थ का नाम दिया था और मुझे भी यही लगता रहा कि उस दिन पिताजी शायद अंत हो जाते।
कल देर रात बात होने के बाद भैया का फिर आज सुबह सवेरे फोन आया तो लगा कुछ खास बात के लिए फोन होगा। पापाजी की शैली में उन्होंने याद दिलाया आज का दिन। मैंने सच में इस दिन को कभी फुर्सत में याद नहीं किया या फिर कभी फुर्सत ही इतनी नहीं मिली कि इस दिन को बहुत अच्छे से याद किया जाए। फिर, यह भी है कि याद करके किसके साथ बातें साझा की जाए।


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