विक्रांत तुम उस दिन कह रहे थे न कि तुम्हें तब लगा कि तुम सही जगह आए हो जब तुमने मुझे अपनी कही बातों को मुझे सादे कागज पर लिखते देखा।
बात २००९ की होगी शायद। देर रात मैं विश्वनाथ बाबू के यहां गया था। उन्होंने मुझसे उस बदमाश के बारे में पूछा तो मैं बता नहीं पाया। फिर उन्होंने कहा था कि कैसा दिखता है। वह कागज पर उसका स्कैच बनवा रहे थे। तब मुझे भी लगा था कि मैं सही जगह आया।
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