JOURNALIST
मुंबई या बिहार!
फैसले लेने का दौर पहले भी था लेकिन अब जो दौर है यह पहले से अलग है क्योंकि अब पापाजी नहीं रहे। मुंबई से वाइंड-अप करने का फैसले को कठिन कहा जाए तो इससे पहले के सभी फैसले को क्या कहा जाएगा! फैसला तो कभी भी आसान नहीं रहा।
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